ख़ुशी

This is completely effect of over reading Mirza Ghalib ji and Faiz Ahmed ji. Cant think more than 4 lines.
Hope you ll like this one.

What is Seed Bombing?

Seed bombing a technique used to plant trees. It is an ancient Japanese practice and Japanese farmer Masanobu Fukuoka is credited for popularizing this ingenious method used in farms in order to increase crop yield. Seed balling, seed grenades and aerial farming are other popular terms used to refer to this farming technique. Seed bombing…

Man Who Created an Entire Forest by Himself – A Hero to Everyone

Jadav Payeng, known as the Forest Man of India, spent 30 years of his life planting trees to save his island, creating a forest and restoring wildlife in it. Jadav Payeng is better known as the Forest Man of India. He earned this name by spending 30 years of his life planting trees, creating a…

ज़िन्दगी

कितना वक़्त गुज़र गया पर आज भी तेरे और मेरे मिज़ाज़ नहीं मिलते हैं, ऐ ज़िन्दगी, चल, तू भी बेशर्म है तो मैं भी ढीठ कम नहीं।

पिंजर

उड़ते परिंदे सी ज़िन्दगी अपनी, जाने किस पिंजरे में कैद हो गई, कोई खोल दे ये मोह, इस आस की कुंडी, उड़ जाऊं और फिर कभी न लौटूं यहां।

तानें!!

बरसात नहीं हुई तो तेरा हाल पूँछ बैठे, ऐ शहर, तेरे दामन में समंदर है, पानी क्यू नहीं, तीखें लहरों का ज़वाब कुछ यूं आया, तेरी बाहों में दिलरुबा है, दीवानी क्यू नहीं

हिसाब

जाने कहाँ मिलते हैं अतीत और आज के पन्ने, ऐ कलम मुझे भी बता दे, कुछ पुराने हिसाब हैं जिन्हें चुकता कर दूं, आज भी आंखों में किरकिरी बन खटकते हुए, कुछ पुराने जज़्बात है जिन्हें चलता कर दूं।

यादें

तेरी यादों के ज़ख्म भरने लगते, कोई याद पुरानी कुरेद जाती है, कोई समझे की ये जगह महलों की नहीं, एक लहर और बस रेत रह जाती है, कोई रोक ले ये वक़्त, ये रस्ता, मंज़िल, मनचले मन में बेवक़्त से जो दस्तक दे, आज फिर बंद कमरे में बिता दी मेरी शाम, तेरी यादों…

आँखें

कुछ बात है शायद इस दिल में जो जुबां के दर से ही लौट जाती हैं कहानी किसी प्रीत की जिसे रीत रोक लेती है कभी गंगा सी बहकर तो कभी शरारतों में डोलकर ये कंचन सी आँखें सब कह देती हैं . कैसे झाकूँ तेरे दिल में, सोचता रह जाता हूँ, क्या हैं इनमे…

रंग

इतने रंग हैं जीवन में, किन्हे चुने और किनसे विमुक्त हो। अलग ही दुविधा है, कैसे इनसे मुक्त हो। कभी अँधेरे में हर कदम साथ निभाते ये रंग, कभी हाथ छुड़ा कर फुर्र हो जाते ये रंग, एक चांदी सा रंग मेरे सपनों सा, एक नीली निशा मेरे उड़ानों का, एक रंग मेरी कलम का,…